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वनों को आग से बचाने दक्षिण वन मंडल ने बनाई रणनीति

डीएफओ के नेतृत्व में अग्नि सुरक्षा की तैयारियों में जुटा वन अमला

✓वनों को आग से बचाने दक्षिण वन मंडल ने बनाई रणनीति
✓डीएफओ के नेतृत्व में अग्नि सुरक्षा की तैयारियों में जुटा वन अमला

परिधि न्यूज बैतूल

 दक्षिण बैतूल (सामान्य) वनमंडल ने फायर सीजन 2023-24 के लिए वन अग्नि सुरक्षा की तैयारियों को पूरा कर लिया है। वनमंडलाधिकारी विजयान्नतम् टी.आर. ने बताया कि नवंबर माह में फायर लाईन साफ-सफाई एवं जलाने का कार्य पूरा हो चुका है। इससे वनों को आग से बचाने में मदद मिलेगी।इस सामूहिक प्रयास के अलावा, दक्षिण बैतूल (सामान्य) वनमंडल ने वनों के संरक्षण के लिए नवीनतम तकनीकी उपकरणों का भी उपयोग किया है। इससे वन कर्मियों को आग से लड़ने और उसे नियंत्रित करने के लिए अधिक अच्छे साधन प्राप्त हो रहे हैं। इस तरह की नवाचारों और प्रयासों से, दक्षिण बैतूल (सामान्य) वनमंडल ने वनों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण प्रगति की है और वन अग्नि के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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डीएफओ विजयान्नतम् टी.आर. ने बताया कि आग वनों को अत्यधिक हानि पहुंचाती है, यह पेड़-पौधों, वन्यप्राणियों, वायु प्रदूषण के साथ भूमि की उर्वराशक्ति पर भी विपरीत प्रभाव डालती है एवं बड़ी मात्रा में वनक्षेत्र प्रभावित होता है। वन अग्नि के दुष्प्रभाव से बैतूल जिला भी अछूता नहीं है। चूंकि बैतूल जिले का अधिकांश भाग सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला अंतर्गत आता है अतः वनक्षेत्र अत्यन्त दुरह, पहाड़ी, खाई, घाटियों से घिरा रहता है जिस कारण आग लगने की सूचना प्राप्त होने पर अग्नि प्रभावित स्थल तक पहुंचकर भीषण गर्मी में आग बुझाना अत्यन्त दुरह कार्य है।


नवम्बर माह से ही विशेष अभियान चलाकर भारतीय वन सर्वेक्षण के वेब पोर्टल वन अग्नि 3.0 पर वनमंडल अंतर्गत समस्त समितियों / ग्राम के सभी सदस्यों के मोबाईल नम्बर पंजीकृत कराये गये ताकि प्रत्येक व्यक्ति को आग लगने की सूचना एस.एम.एस. के माध्यम से प्राप्त हो सके, इस पंजीकरण कार्य में जनप्रतिनिधियों, अन्य विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों के मोबाईल नम्बर भी पंजीकृत कराये गये है। दक्षिण बैतूल (सा.) वनमंडल द्वारा वर्तमान में पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा 6272 मोबाइल नंबरों का पंजीकरण किया गया है, जिसके लिए वन विभाग द्वारा दक्षिण बैतूल वनमंडल की प्रशंसा की गई है। उल्लेखनीय है कि पूरे प्रदेश में कुल 74374 मोबाइल नंबर पंजीकृत किये गये है।
एसएमएस से मिलेगी आग की सूचना–


इन पंजीकरणों से एस.एम.एस. के माध्यम से आग की सूचना समय प्राप्त होगी, जिससे अग्नि प्रभावित स्थल पर अतिशीघ्र पहुंच कर आग बुझाने का कार्य समय पर किया जा सकेगा। वनमंडल अंतर्गत समस्त वनसुरक्षा एवं ग्राम वन समितियों की विशेष अग्नि सुरक्षा हेतु 114 बैठकें आयोजित की गई जिसमें माननीय मुख्य वनसंरक्षक, वन वृत बैतूल एवं वनमंडलाधिकारी दक्षिण बैतूल स्वयं भी उपस्थित रहे तथा ग्रामों में विभिन्न खेल प्रतियोगिता जैसे किकेट, वालिवाल, फुटबाल, कबड्डी आयोजित कर वनों को आग से बचाने हेतु ग्रामवासियों को प्रेरित किया गया। वनों को आग से बचाने हेतु जागरूकता शिविरों का भी आयोजन किया गया तथा वन अग्नि सुरक्षा हेतु पोस्टर पेम्पलेट प्रत्येक ग्राम में उचित स्थानों पर चस्पा किये गये है। साप्ताहिक बाजारों में मुख्य स्थानों पर ऑडियों / वीडियों के माध्यम से वनों में आग नहीं लगाने हेतु आमजन को जागरूक किया गया। वनों को आग से बचाने हेतु “SOP”, “वन अग्नि दिशा निर्देश” जारी किये गये। चूकिं आग स्वयं नहीं लगती अतः ऐसे कृषिभूमि क्षेत्र जो कि वन सीमा के नजदीक है कृषिभूमि धारकों को विशेष रूप से आग न लगाने हेतु प्रेरित किया गया है। ग्रामवासियों को महुआ वृक्षों के नीचे आग न लगाने हेतु समझाईश दी गई, नेट के माध्यम से महुआ संग्रहण कार्य करने हेतु प्रेरित किया गया।
– फायर कन्ट्रोल सेन्टर स्थापित–


वन अग्नि की त्वरित सूचना के आदान प्रदान एवं दूरदराज के वनक्षेत्रों में आग की सूचना प्रेषित करने हेतु वनमंडल स्तर पर “फायर कन्ट्रोल सेन्टर” स्थापित है, जो कि 24 घंटे कार्यरत रहता है जिससे वन अग्नि की सूचना तत्काल संबंधित बीट में पदस्थ वन कर्मचारियों को प्राप्त हो जाती है, जिससे कम से कम समय में आग पर नियंत्रण पाया जा सकता है। आग पर नियंत्रण पाने हेतु प्रत्येक परिक्षेत्र को ब्लोअर भी प्रदाय किये गये जिससे आग पर नियंत्रण पाने में आसानी होगी। वन कर्मचारियों को इस हेतु प्रशिक्षण भी दिया गया। वनों को आग से बचाने हेतु अलग-अलग टीम बनाकर वनक्षेत्र में निरंतर गश्ती की जा रही है।

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