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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ते जंगल: ‘वन विकास निगम’ अब बना ‘वन विनाश निगम’

✓रामपुर भतोड़ी परियोजना के अंतर्गत चूनाहजूरी रेंज में हालात बदतर, अधिकारियों ने साधी चुप्पी
परिधि न्यूज चिचोली

रामपुर भतोड़ी परियोजना के अंतर्गत आने वाले चूना हजूरी रेंज से एक गंभीर मामला सामने आया है। कभी हरे-भरे वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पहचाने जाने वाला यह क्षेत्र अब प्रशासनिक अनदेखी और भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है। आलम यह है कि ‘वन विकास निगम’ अपनी साख खोकर अब ‘वन विनाश निगम’ की छवि बनाता जा रहा है।
​धरातल से गायब हो रहे मुनारे (सीमा चिन्ह)
​जंगलों की सुरक्षा और सीमाओं को चिन्हित करने वाले मुनारे (कंपार्टमेंट मार्कर्स) की स्थिति वर्तमान में अत्यंत दयनीय बनी हुई है। अधिकांश मुनारे क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे जंगल की सरहदें धुंधली पड़ गई हैं। इसका सीधा फायदा भू-माफिया और रसूखदारों को मिल रहा है, जिसके चलते जंगलों में अतिक्रमण चरम पर पहुँच गया है।
​अवैध कटाई और शिकार का बोलबाला
​सीमा चिन्हों के अभाव और ढीली सुरक्षा व्यवस्था का लाभ उठाकर जंगलों में अवैध कटाई जोरों पर है। बेशकीमती लकड़ियों की तस्करी बेखौफ जारी है। स्थानीय सूत्रों की मानें तो रात के अंधेरे के साथ-साथ अब दिन के उजाले में भी जंगलों को साफ किया जा रहा है।
​रक्षक ही बने भक्षक: भ्रष्टाचार के आरोप
​सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जंगलों की सुरक्षा के लिए तैनात वन अमला अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय कथित तौर पर भ्रष्टाचार की गतिविधियों में लिप्त है। आरोप है कि मैदानी कर्मचारी और वनरक्षक अवैध गतिविधियों को रोकने के बजाय उन्हें बढ़ावा दे रहे हैं।
​जिम्मेदारों की रहस्यमयी चुप्पी
​इस पूरे मामले में संभागीय प्रबंधक से लेकर रेंजर और वनरक्षक तक की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। बार-बार शिकायतें होने के बावजूद अधिकारियों ने मौन साध रखा है। यह चुप्पी न केवल उनकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाती है, बल्कि अवैध गतिविधियों को मौन संरक्षण देने की ओर भी इशारा करती है।
​मुख्य बिंदु:
​➡️क्षतिग्रस्त मुनारे: कंपार्टमेंट की पहचान खत्म होने से बढ़ा अतिक्रमण।
​➡️बेखौफ तस्कर: अवैध कटाई से घट रहा है वन क्षेत्र।
​प्रशासनिक विफलता: जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से जंगल खतरे में।
अगर समय रहते इन गतिविधियों पर अंकुश नहीं लगाया गया और मुनारों की मरम्मत कर सीमाओं को सुरक्षित नहीं किया गया, तो रामपुर भतोड़ी परियोजना के ये जंगल केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगे इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों संपर्क के प्रयास किए गए लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

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