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महिला- युवा मोर्चा अध्यक्ष की दौड़ में श्रेष्ठ कौन..?रिपीट होगी जिम्मेदारी या नए चेहरों पर लगेगा दांव

✓महिला- युवा मोर्चा अध्यक्ष की दौड़ में श्रेष्ठ कौन..?

✓रिपीट होगी जिम्मेदारी या नए चेहरों पर लगेगा दांव

गौरी बालापुरे पदम/परिधि पॉलिटिकल बैतूल


जिला भाजपा में खासतौर से महिला और युवा मोर्चा में अंदरूनी खलबली मची है। महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष ममता मालवीय और युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष भास्कर मगरदे का 4 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने एवं प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष और युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के नामों की घोषणा के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि वर्षांत तक भाजपा के दोनों प्रमुख मोर्चे के अध्यक्षों की घोषणा हो जाएगी।लेकिन अभी शांति शांति है। जहां पार्टी में अंदरूनी सुगबुगाहट नामों को लेकर चल रही है वहीं दूसरी ओर अध्यक्ष बनने की चाह में कई मोर्चा मंडल अध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बैतूल प्रवास पर होने के दौरान उनकी नजर में आने या नज़र के सामने रहने की जुगत में रहते है।


भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम में एक महीने पहले नई नियुक्तियां की गई, इस टीम में प्रदेश कार्यालय व्यवस्था प्रभारी, प्रदेश मोर्चा प्रभारी और प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी की नई जिम्मेदारी पार्टी नेताओं को सौंपी गई है। वहीं 22 नवंबर को युवा मोर्चा और महिला मोर्चा अध्यक्षों की नियुक्ति की सूची भी जारी कर दी गई थी। इसमें युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर और प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष की जिम्मेदारी अश्विनी परांजपे को सौंपी गई थी। निवर्तमान प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष माया नारोलिया से बैतूल की कई नेत्रियों की घनिष्ठता सोशल मीडिया पर सामने आती रही है, इसलिए उनके प्रदेश अध्यक्ष रहने तक उम्मीद की जा रही थी कि बैतूल की उनकी करीबी महिला नेत्रियों को प्रदेश टीम में भी स्थान मिलेगा।हालांकि अश्विनी परांजपे के प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष बनते ही सोशल मीडिया पर उनके साथ अपनी फोटो अपलोड करने वाली नेत्रियों की भी बाढ़ आ गई थी।कुछेक तो बधाई देने राजधानी भी घूम आई।दिखने- छपने वालो से होगा किनारा या इन्हीं की नैया लगेगी पार


वैसे भाजपा की परम्परा रही है कि अध्यक्ष की दौड़ में जिन नामों का जोर शोर से प्रचार प्रसार हो जाता है, पार्टी उन नामों से किनारा कर लेती है, पिछले कुछ महीनों से महिला मोर्चा अध्यक्ष बनने की चाह में आधा दर्जन से अधिक नेत्रियां अपनी योग्यता दिखाने का पुरजोर प्रयास कर रही है।कुछ नवाचार से तो कुछ कार्यक्रमों में सक्रियता दिखाकर प्रदेश अध्यक्ष की गुड लिस्ट में शामिल होने के प्रयास में भी है। चाहे महिला मोर्चा हो या युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष बनने के लिए जोर आजमाइश का दौर दीपावली मिलन के बाद से ही शुरू हो गया था। हेमंत भैया के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद जिले में मोर्चा अध्यक्ष भी पावरफुल होंगे ही इस उम्मीद के चलते नए चेहरे भी भाग्य आजमाने मैदान में है। कुछेक छप चुके है कुछेक हर जगह नजर आने की फिराक में है।यह सब बस इसलिए कि प्रदेश अध्यक्ष सक्रियता देखकर उन्हें मोर्चा का अध्यक्ष बना दे।
सिफारिश आएगी काम या देखा जाएगा काम
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार महिला मोर्चा के लिए अध्यक्ष की नियुक्ति यदि बिना किसी सिफारिश के हुई तो पारदर्शिता बनी रह सकती है, लेकिन सिफारिश में चल रहे नाम पर मुहर लगी तो आपसी तकरार भी सामने आएगी।सूत्रों के अनुसार पूर्व में भी एक अध्यक्ष के विरुद्ध उसी की टीम की एक महिला नेत्री अपना इस्तीफा लेकर विधायक आवास पहुंच गई थी।महिला मोर्चा में अंदरूनी खटपट पता सबको है, पर सब आदर्श पार्टी और अनुशासन के चक्कर में एक दूसरे के सामने भड़ास निकाल देते है और चुप हो जाते है। कुछ महिला नेत्रियों को चाटुकारी के चक्कर में अवसर और मदद मिल जाती है और कुछ काबिल होने के बाद भी इसलिए पीछे छूट जाती है क्योंकि उन्हें अपने ही लोगों का समर्थन और संबल नहीं मिल पाता। जिले में मोर्चा के हाल कुछ ऐसे ही है।अंदरूनी प्रतिस्पर्धा और जलन मोर्चा की एकता को ग्रहण लगा रही है।एक के कार्यक्रम में दूसरा मदद नहीं कर रहा और दूसरे के कार्यक्रम से पहला दूर भाग रहा है। इन सब से परे महिला मोर्चा में एक धड़ा ऐसा भी है जिसको गुटबाजी की चर्चा आए दिन सुर्खियां बटोरती है।
भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहती नेत्रियां VIP कल्चर ने बिगाड़ी आदतें

राजनीति में मुखर होती महिलाओं में अब पद पाने की होड़ है। कुछ महिला नेत्रियां तो अपने आप को VIP कल्चर का हिस्सा मान चुकी है, और  इसकी वजह से कार्यकर्ताओं में उनकी पैठ कम हो रही है जबकि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का एक ही मूल मंत्र है कि पार्टी में कार्यकर्ता ही सर्वोपरि है।इससे परे विडंबना यह है कि जिला भाजपा के राजनीतिक परिदृश्य थोड़ा अलग है। अनुशासित पार्टी में देर रात में भी VIP कल्चर का शिकार महिला नेत्रियां सर्किट और रेस्ट हाउस में गुलदस्ते लेकर पहुंच जाती है और अपनी पहुंच का ढिंढोरा सोशल मीडिया पर पीटती है। VIP कल्चर का शिकार नेत्रियां फिलहाल इस जद्दोजहद में है कि किसी तरह वह जिला अध्यक्ष बन जाए बस।आलम यह है कि VIP के आने पर कुछ तो अलग से प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना मेल मुलाकात कर आती है।बैतूल की राजनीति में महिलाओं के गुलदस्ता कल्चर को लेकर पुरानी कहावतें मशहूर है, लेकिन अब इसकी परवाह न राजनीतिक परिवारों को है न राजनीति के कर्णधारों को।
रिपीट या नया होगा अध्यक्ष..?
वैसे तो आदित्य बबला शुक्ला जिला भाजपा के बेबाक,बेदाग जिलाध्यक्ष चार साल तक रहे, उम्मीद भी की जा रही थी उन्हें फिर से मौका मिलेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं।ग्रामीण क्षेत्र के युवा नेता भास्कर मगरदे को युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाने के पीछे ग्रामीण युवाओं में भाजपा के प्रति विश्वास और समर्पण जगाना था।महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष ममता मालवीय ने पार्षद रहते हुए अपना दायित्व और कर्तव्य निभाया, संभवतः इसी वजह से वह आश्वस्त भी हो सकती है कि दोबारा उन्हें मोर्चा जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलेगी, लेकिन उन्हें अपने ही आसपास के लोगों से सतर्क रहना होगा। सूत्रों की माने तो महिला मोर्चा के लिए तीन नाम अपनी अपनी पैरवी बड़े और प्रदेश अध्यक्ष के करीबी नेताओं से कराने में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है। यहां एक दूसरे के विरोधी होने के बावजूद अगर मैं तो  जिले की टीम में तू भी..इसको लेकर तीनों आश्वस्त भी है।होड़ यह भी है कि साम, दाम ,अर्थ, भेद जो भी आजमाना पड़े पर जिले में छलांग लगनी चाहिए। इधर युवा मोर्चा के लिए अब किसी शहरी चेहरे पर मुहर लगने की संभावना है।अब देखना यह है कि 2025 के अंतिम पड़ाव में घोषणा होगी या नए साल2026 में जश्न मनाएगा महिला और युवा मोर्चा!

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