जिला अस्पताल में प्रसूता की डेड बॉडी को ICU में किया शिफ्ट,परिजनों ने लगाए डॉक्टर वंदना धाकड़ पर लापरवाही के आरोप
✓जिला अस्पताल में प्रसूता की डेड बॉडी को ICU में किया शिफ्ट
✓परिजनों ने लगाए डॉक्टर वंदना धाकड़ पर लापरवाही के आरोप
✓मृतिका की सास से डॉक्टर धाकड़ ने दो कागजों पर लगवा लिए दोनों हाथों के अंगूठे
गौरी बालापुरे पदम/परिधि न्यूज बैतूल

आई सी यू के सामने एक महिला कड़कड़ाती ठंड में 8 दिन की नवजात लाड़ली लक्ष्मी गोद को लेकर अपने बेटे के आने का इंतजार कर रही थी।रात का 12 बज चुका था और उसे एक घंटे पहले ही बताया गया कि उसकी बहु की मौत हो चुकी है। आठ दिन पहले ही बहु ने बेटी को जन्म दिया था और चार दिन पहले ही उसकी छुट्टी हुई थी।दो दिन पहले दमे की शिकायत होने पर उसे पति, सास और चाची जिला अस्पताल लेकर आए।शाम 6 बजे अस्पताल में भर्ती करने के बाद उसने करीब 8 बजे तीन रोटियां भी खाई।स्थिति बिल्कुल सामान्य थी तो मां को अपनी पत्नी और दूधमुंही बच्ची के पास छोड़कर पति कंबल और जरूरत का सामान लेने गांव लौट गया।तीन घंटे बाद जब वापस अस्पताल लौटा तो उसके पैरों तले जमीन नहीं थी। मां ने रो रोकर बेटे को बहू के उपचार में हुई लापरवाही के बारे में बताया।यह आंखों देखी है जिला अस्पताल की जहां डॉक्टर वंदना धाकड़ की लापरवाही के कारण एक प्रसूता की मौत हो गई।

घोड़ाडोंगरी विकासखंड के ईमलीखेड़ा(आमढाना), थाना चौपना निवासी 25 वर्षीय समोती (25 वर्ष) पत्नी अमन मोचम की शुक्रवार देर शाम जिला अस्पताल में मौत हो गई।परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार समोती ने 7 नवंबर को जिला अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया था, 11 नवंबर उसे डिस्चार्ज कर दिया। शुक्रवार सुबह से ही समोती को सांस लेने में दिक्कत थी।उसे दमा की परेशानी थी।हालत बिगड़ने पर उसे शाम को प्राइवेट वाहन से जिला अस्पताल लाया गया। शाम 6 बजे समोती को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। 8 बजे उसे ग्लूकोज चढ़ाया गया और थोड़ी थोड़ी देर में अलग अलग वार्ड में शिफ्ट किया गया। उपचार के दौरान ही समोती की मौत हो गई।
साक्ष्य छुपाने की साजिश
समोती का उपचार डॉ वंदना धाकड़ द्वारा किया जा रहा था, उपचार के दौरान जब उसकी मौत हो गई तो साक्ष्य और लापरवाही छुपाने के पूरे प्रयास डॉक्टर द्वारा किए गए।महिला की मौत हो जाने की पुष्टि होने के बाद भी उसे रात करीब 10 बजे ICU में शिफ्ट किया गया और करीब एक घंटे बाद परिजनों को ICU से बाहर आकर सूचना दी गई कि समोती की मौत हो गई है।इसके बाद भी डॉक्टर अपनी लापरवाही उजागर न हो इसके लिए षड्यंत्र रचती रही। मृतिका की सास से कुछ दस्तावेजों पर दोनों हाथों के अंगूठे भी लगवा लिए और किसी से कुछ न बताने का भी दबाव बनाया गया। गोद में 8 दिन की बिटिया और सामने बहु का शव देख सास सदमे में थी। पास में मोबाइल भी नहीं था किसी से मोबाइल लेकर बेटे को सूचना दी। 10 बजे से रात 1 बजे तक दोनों महिला परिजन ICU के सामने बैंच पर बैठी रही।दादी की गोद में अपनी मां को खो चुकी 8 दिन की मासूम बच्ची भी थी।
सास और पति ने लगाए लापरवाही के आरोप
समोती की मौत के लिए पति और सास ने डॉक्टर ने बड़ी मैडम को जिम्मेदार बताया है।सास और चाची का कहना है कि वह पहली बार ही जिला अस्पताल आए है किसी को नहीं पहचानते।बड़ी मैडम( डॉ वंदना धाकड़) ने उपचार में भी देरी की।स्टाफ की कुछ नर्स भी उन्हें डांट रही थी।उनका कहना था कि भोपाल ले जाना था बैतूल क्यों ले आए। गौरतलब है कि समोती ने स्थिति जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद तीन रोटियां भी खाई इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उसकी स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं थी।कुछ प्रत्यक्ष दर्शियों ने बताया कि 6-7 लोगों की टीम जब समोती को ICU में शिफ्ट कर रही थी इस दौरान उसका हाथ स्ट्रेचर से नीचे लटक गया था तब स्टाफ ने ही हाथ की वापस स्ट्रेचर पर रखा।उसी वक्त सब जान गए थे कि समोती नहीं रही।पति और सास ने लापरवाह डॉक्टर के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। इधर जानकारी मिलते ही सीएस डॉ जगदीश घोरे ने भी चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की जाकर जांच कराई जा रही है।समाचार लिखे जाने तक मृतिका का पीएम जारी था।
इनका कहना..
चार डॉक्टर की कमेटी द्वारा जांच की जाएगी। जांच कमेटी में दो PGMO को भी रखा गया है।जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ जगदीश घोरे, सीएस जिला अस्पताल बैतूल
मैं जबलपुर में हूं ,,मुझे सुबह ही इस संबंध में जानकारी मिली है।जांच कराई जाएगी।दोषी पाए जाने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
डॉ मनोज हुरमाडे सीएमएचओ बैतूल