एक वर्ष के मासूम ने ट्रेन में तोड़ा दम,शव को घर ले जाने के नहीं पैसे, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत बने मददगार, स्टेशन पर भिजवाया शव वाहन
✓एक वर्ष के मासूम ने ट्रेन में तोड़ा दम,शव को घर ले जाने के नहीं पैसे, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत बने मददगार
✓काम के लिए वैष्णवदेवी गया था बोरदेही हरन्या का आदिवासी परिवार
✓शव वाहन से गंतव्य तक पहुंचाई पार्थिव देह
✓जनप्रतिनिधि, समाजसेवी, आरपीएफ-जीआरपी, स्टेशन प्रबंधन ने भी की आर्थिक मदद
परिधि न्यूज बैतूल

रेलवे स्टेशन बैतूल से एक साल के बच्चे को शव को बोरदेही पहुंचाने के लिए आज एक बार फिर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं बैतूल विधायक हेमंत खण्डेलवाल मददगार बने। वर्षों पहले एक आदिवासी की पीड़ा से द्रवित होकर ही बैतूल में शव वाहन की शुरुआत श्री खण्डेलवाल ने की थी। अब तक उनके द्वारा संचालित शव वाहन से हजारों शवों का परिवहन किया जा चुका है। जानकारी के अनुसार मासूम बच्चे के माता-पिता कटरा से बोरदेही के लिए 31 अक्टूबर को निकले थे, लेकिन बीच रास्ते में बच्चे की तबियत खराब होने पर उन्होंने भोपाल में रुककर अपने बच्चें को रात करीब 1 बजे इंदिरा गांधी महिला एवं बाल्य चिकित्सालय ले गए। डॉक्टर ने यहां बच्चे को मृत घोषित कर दिया। बच्चे का शव लेकर माता-पिता जयपुर एक्सपे्रस से बैतूल आ गए। समाजसेवी, आरपीएफ-जीआरपी, स्टेशन प्रबंधन एवं बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति के साझा प्रयास एवं विधायक हेमंत खण्डेलवाल की मदद से बच्चे के माता-पिता को मदद मिली और अपने मासूम बच्चे के शव को शववाहन से लेकर दोनों बोरदेही क्षेत्र के ग्राम हरन्या पहुंचे।

यह है पूरा घटनाक्रम
रेलवे स्टेशन बैतूल के प्लेटफार्म नंबर एक पर आरपीएफ प्रधान आरक्षक फरहा खान और पूजा जागरुकता कार्यक्रम चला रहा थी, इसी बीच जयपुर एक्सप्रेस से उतरकर हरन्या (बोरदेही)निवासी यात्री मनराज उईके दोनों के पास आया और हाथ में माईक थामे अनाउंसमेंट कर रही खाकी वर्दी पहने फरहा के कानों में कहा कि उसे मदद चाहिए। कैसी मदद पूछने पर मनराज ने कहा कि उसके एक साल के बच्चे की मौत हो गई है और घर तक पहुंचने के लिए उसके पास पैसे नहीं है। फरहा ने आरपीएफ इंस्पेक्टर राजेश बनकर, स्टेशन मास्टर वीके वरकड़े, प्रधान आरक्षक संतोष पटेल को इस संबंध में सूचना दी और यहीं से यात्री की मदद की कवायद शुरु हुई।
आरपीएफ एवं स्टेशन मास्टर ने बैतूल सांस्कृतिक समिति से मदद मांगी। संस्था से जुड़े ऑटो एम्बुलेंस चालक अमित तिवारी आदिवासी परिवार को ऑटो से बोरदेही ले जाने तैयार भी हो गए थे, लेकिन समिति की अध्यक्ष गौरी पदम ने दूरी अधिक होने की वजह से ऑटो की बजाय शव वाहन के लिए प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल से मदद मांगी। श्री खण्डेलवाल के संज्ञान में मामला आते ही उन्होंने तत्काल शव वाहन चालक चैतराम को स्टेशन भिजवाने के लिए निर्देशित किया। जिसके बाद आदिवासी परिवार शव वाहन से हरन्या के लिए रवाना हुआ। गौरतलब है कि ऑटो एम्बुलेंस से शव परिवहन पर भी ऑटो चालक को श्री खण्डेलवाल द्वारा ही 1000 रुपए प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है।
आदिवासी परिवार की आर्थिक मदद
आदिवासी परिवार को बोरदेही पहुंंचाने के लिए आरपीएफ एवं जीआरपी द्वारा भी धनराशि एकत्रित की गई, जब समाजसेवी बंटी गौरव राठौर को यह जानकारी मिली तो उन्होंने भी एक हजार रुपए की आर्थिक मदद की। एकत्रित हुई राशि करीब 3500 रुपए आदिवासी परिवार को ही सौंप दिए गए। मनराज ने बताया कि वह अपने ग्राम हरन्या में एक छोटी सी कुटिया में रहता है और पत्नी चांदनी उईके के साथ कमाने के लिए कटरा वैष्णवदेवी गया था। यहां उनके एक वर्ष के बेटे मनोज की तबियत खराब होने पर वह वापस बोरदेही आ रहे थे, बीती रात को ट्रेन में ही उसकी सांसे रुक गई थी, जिसकी वजह से घबराकर वह भोपाल में ही ट्रेन से उतर गए और करीब एक बजे वह बच्चे को भोपाल के अस्पताल ले गए, लेकिन बच्चे की मौत हो चुकी थी। जयपुर एक्सप्रेस से वह किसी तरह बैतूल पहुंचे और मदद मांगी। बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति ने इस संवेदनशील मामले में तत्परता से मदद के लिए सभी का आभार माना है।