प्रशासकीय सुविधा या अव्यवस्था: 60 किलोमीटर दूर तक अतिरिक्त प्रभार, जिला पंचायत के आदेश पर उठे सवाल
✓प्रशासकीय सुविधा या अव्यवस्था: 60 किलोमीटर दूर तक अतिरिक्त प्रभार, जिला पंचायत के आदेश पर उठे सवाल
परिधि न्यूज बैतूल

जिला पंचायत बैतूल द्वारा 06 अगस्त 2026 को जारी आदेश के माध्यम से जनपद पंचायत भैंसदेही अंतर्गत छह ग्राम पंचायतों के अतिरिक्त सचिवीय प्रभार विभिन्न ग्राम पंचायत सचिवों को सौंपे गए हैं। आदेश में “प्रशासकीय कार्य सुविधा को दृष्टिगत रखते हुए” अतिरिक्त प्रभार दिए जाने का उल्लेख किया गया है, लेकिन आदेश के सामने आने के बाद यह निर्णय चर्चा का विषय बन गया है।
कारण यह है कि कई सचिवों को उनकी मूल पदस्थापना से 30 से 60 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त दायित्व सौंपा गया है, जिनमें से कुछ पंचायतें अलग-अलग सेक्टरों में आती हैं।जानकारों का कहना है कि पंचायत सचिव पहले से ही अपनी मूल ग्राम पंचायत में शासन की अनेक योजनाओं के संचालन, पंचायत कार्यालय, ग्रामसभा, निर्माण कार्यों की निगरानी, वित्तीय प्रबंधन, पीएम आवास योजना, मनरेगा, जन्म-मृत्यु पंजीयन, कर वसूली तथा अन्य प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में दूरस्थ ग्राम पंचायत का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से दोनों पंचायतों के कार्य प्रभावित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
आदेश में इस प्रकार दिए गए अतिरिक्त प्रभार
बानूर से धाबा – लगभग 25 किलोमीटर
राक्सी से डेडवाकुंड – लगभग 60 किलोमीटर (नवापुर सेक्टर से धाबा सेक्टर)
झल्लार से धार – लगभग 50 किलोमीटर (झल्लार सेक्टर से धूड़ियानई सेक्टर)
मच्छी से विजयग्राम – लगभग 30 किलोमीटर
चोपनीखुर्द से कोथलकुंड – लगभग 60 किलोमीटर (नवापुर सेक्टर से धाबा सेक्टर)
सावलमेंढ़ा से जामुलनी – लगभग 30 किलोमीटर
ग्रामीणों को समय पर कैसे मिलेंगी सेवाएं?
पंचायत स्तर पर प्रत्येक दिन अनेक प्रशासनिक एवं विकास संबंधी कार्य संपादित किए जाते हैं। यदि सचिव को प्रतिदिन 30 से 60 किलोमीटर की दूरी तय कर दूसरी पंचायत में भी उपस्थित होना पड़े, तो दोनों पंचायतों में नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना व्यवहारिक रूप से कठिन हो सकता है। इसका असर योजनाओं के क्रियान्वयन, हितग्राही मूलक कार्यों, निर्माण कार्यों के निरीक्षण तथा आम नागरिकों को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ सकता है।
“प्रशासकीय सुविधा” पर उठ रहे सवाल
आदेश में “प्रशासकीय सुविधा” का उल्लेख अवश्य किया गया है, लेकिन यह प्रश्न उठ रहा है कि जब आसपास की ग्राम पंचायतों में सचिव उपलब्ध हो सकते थे, तब इतनी अधिक दूरी और अलग-अलग सेक्टरों में अतिरिक्त प्रभार देने की आवश्यकता क्यों पड़ी? यदि निकटवर्ती पंचायतों में व्यवस्था संभव थी, तो दूरस्थ पंचायतों में प्रभार सौंपने का आधार क्या रहा?
नियमों और व्यवहारिक पक्ष पर चर्चा
पंचायत प्रशासन से जुड़े लोगों का मानना है कि अतिरिक्त प्रभार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखना होता है, न कि ऐसी स्थिति उत्पन्न करना जिससे कार्य प्रभावित हों। सामान्यतः अतिरिक्त प्रभार निकटवर्ती ग्राम पंचायतों में दिया जाता है ताकि अधिकारी या कर्मचारी दोनों स्थानों पर प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। दूरस्थ पंचायतों का प्रभार दिए जाने से समय, संसाधन और शासकीय कार्यों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है।
क्या होगा पुनर्विचार?
जिला पंचायत के इस आदेश के बाद पंचायत कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या इस व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाएगा। यदि इन दूरियों के कारण ग्राम पंचायतों का कार्य प्रभावित होता है या ग्रामीणों को समय पर सेवाएं नहीं मिल पाती हैं, तो प्रशासन को आदेश की समीक्षा कर निकटवर्ती पंचायतों में अतिरिक्त प्रभार देने पर विचार करना पड़ सकता है।फिलहाल, जिला पंचायत द्वारा जारी इस आदेश ने “प्रशासकीय सुविधा” की अवधारणा को लेकर कई व्यावहारिक और प्रशासनिक प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनका उत्तर आने वाले समय में कार्य व्यवस्था से ही स्पष्ट हो सकेगा।