मिट्टी से खेलते खेलते मूर्तिकार बन गए राजेश वर्मा, 5 वर्षो से बैतूल की महारानी टिकारी वाली महाकाली की बना रहे प्रतिमा
इस नवरात्रि में राजेश की बनाई 12 महाकाली सहित 17 प्रतिमाओ के दर्शन करेंगे श्रद्धालु

गौरी पदम/नवरात्रि विशेष परिधि कलाकार
नवरात्रि का पर्व चल रहा है और ऐसे अवसर में परिधि न्यूज़ आपके लिए लेकर आया है खास पेशकश जी हां हम आज नवरात्रि के पहले दिन से आपको जिले के ऐसे कलाकारों से रूबरू कराने जा रहे हैं, जिनकी कला ही उनकी पहचान है। श्रंखला की शुरुआत करते हैं बैतूल जिले की महारानी के नाम से प्रसिद्ध महाकाली जी की प्रतिमा के निर्माण करने वाले कलाकार राजेश वर्मा उर्फ रानू से।

अनगिनत मूर्तियां बना चुके राजेश
चंद्रशेखर वार्ड पुराना सांई मंदिर के पास रहने वाले राजेश वर्मा बचपन से ही कला के धनी है। 18 वर्ष की उम्र से इन्होंने मूर्ति कला को ही अपना प्रमुख व्यवसाय बनाया और देवी प्रतिमाओं का निर्माण शुरू किया। मां कल्पना वर्मा बताती है कि राजेश बचपन से ही मिट्टी से खेलते थे। कई बार मिट्टी से खेलते हुए नमी वाली जगह पर ही सो भी जाते थे। पहली बार राजेश ने शिवलिंग, फिर श्री गणेश, लक्ष्मी जी की प्रतिमा बनाई, एक से दो, दो से चार और अब तक अनगिनत मूर्तियां राजेश बना चुके है।मूर्ति बनाने पूर्णतः दक्ष हो चुके इस कलाकार ने बैतूल में आकर प्रतिमा बनाने वाले कोलकाता के कलाकारो से कला की तकनीकी जानकारी प्राप्त की और अपनी कला को निखारा। अब राजेश 21 फीट की मूर्तियां भी बना रहे है। मूर्तिकार राजेश वर्मा किसी परिचय के मोहताज नहीं है। उनकी कला की दक्षता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बैतूल जिले की महारानी महाकाली की प्रतिमा का निर्माण पिछले 5 वर्षों से उनके द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष 21 फीट ऊंची महाकाली की प्रतिमा का निर्माण उनके द्वारा किया गया।परिधि न्यूज़ से चर्चा के दौरान राजेश वर्मा बताते हैं कि इस वर्ष उन्होंने बैतूल शहर में स्थापित की जाने वाली 12 काली मां की प्रतिमाओं का निर्माण किया है। इसके अलावा मां दुर्गा की प्रतिमाएं, साईबाबा एवं भोलेनाथ की प्रतिमाओं का भी निर्माण इस नवरात्रि में उनके द्वारा किया गया है।

राजेश की इस कला में उनका पूरा परिवार और छोटे भाई ऋतुराज वर्मा भी पूरा सहयोग करते हैं।राजेश एवं ऋतुराज सिर्फ मां दुर्गा मां काली की प्रतिमाएं ही नहीं बनाते हैं अपितु गणेश उत्सव में गणेश प्रतिमाओं का निर्माण भी उनके द्वारा किया जाता है। बैतूल के विभिन्न मंडल राजेश वर्मा से प्रतिमाओं के निर्माण करवाने के लिए आतुर रहते हैं। उनके पास वर्ष की शुरुआत में ही नवरात्रि एवं गणेश उत्सव के लिए आर्डर बुक हो जाते हैं।

कई बार वे मजबूरी में दुर्गा मंडलों के ऑर्डर लेने से मना कर देते हैं, वे जितना कार्य कर सकते हैं उतना ही अपने हाथ में लेते हैं।उन्होंने अब तक 8 से ज्यादा युवकों को भी इस कला में प्रशिक्षित किया है जो अब खुद आर्डर लेकर मूर्तियां बना रहे है।