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राजस्व-भूमि से तौबा, फारेस्ट लैण्ड पर नए गड्ढे बनाकर निकाला जा रहा कोयला

✓चार थाने, एक एसडीओपी, खनिज, राजस्व, वन विभाग की नजर से कैसे बच जाता है माफिया
✓स्थानीय माफिया के साथ अब अब परासिया का कोल माफिया डुल्हारा में सक्रिय

परिधि न्यूज बैतूल

फाइल फोटो

डुल्हारा में कोयला माफिया फिर सक्रिय होने लगा लगा है। अवैध कोयला उत्खनन के लिए इस बार नए तरीके से बिसात बिछाते हुए फूंक-फूंककर कदम रखे जा रहे है। डुल्हारा एवं आसपास के क्षेत्र में कोयले का अवैध रुप से खनन वर्षों से चलता रहा है, लेकिन पहला मौका था जब वर्ष 2025 में कोल माफिया पर तत्कालीन कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी द्वारा मुहाने एवं सुरंग बंद करने की सख्त कार्रवाई के बाद लम्बे समय तक कोल माफिया अज्ञातवास पर रहा। अब धीरे-धीरे फिर कोल माफिया सक्रिय होने लगा है और डुल्हारा की भूमि पर फिर खनन शुरु कर दिया गया है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ दिनों से रात के समय कोयला खनन कर पहले ट्रेक्टर ट्राली और फिर ट्रक में लोड कर रवाना किया जा रहा है। कोयला खनन में इस बार स्थानीय माफिया के साथ अब पड़ोसी जिले से एक विशेष समुदाय के व्यक्ति की सक्रियता चर्चा में है। फगन, प्रेम, सूरज के बेटे के साथ विशेष समुदाय के व्यक्ति की चौकड़ी की फिल्डिंग से फॉरेस्ट लैंड को छलनी किया जा रहा है।हालांकि कोयला खनन की सूचना पर खनिज विभाग आज मौके पर पहुंचा है और नए गड्ढे भी बंद करने की कार्रवाई जारी है,लेकिन सवाल यही है कि बार बार जिले के बाहर के लोग आकर कोयला खनन को अंजाम देते है। कोल माफिया पर पूरी तरह अंकुश लगाने में आखिर क्यों तंत्र नाकाम हो जाता है?
फारेस्ट लैण्ड पर कोल माफिया की नजर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस बार कोल माफिया की चौकड़ी का पूरा ध्यान फारेस्ट लैण्ड से कोयला खनन करने का है। ग्रामीणों को कोयला खनन के लिए फिर से भरोसे में लेकर स्थानीय और बाहरी माफिया अब फिर से कोयला खनन कर रहा है। उत्तर वन मंडल के अंतर्गत आने वाले डुल्हारा से सटे क्षेत्र में फगन और सूरज के बेटे के संरक्षण में परासिया का माफिया पिछले कुछ दिनों से नए पुराने मुहानों से कोल खनन करने जुट गया है। कोयला खनन को लेकर जब करीब एक वर्ष पहले सख्त कार्रवाई की गई थी तब तत्कालीन कलेक्टर ने ग्रामीणों की चौपाल बुलाकर उन्हें समझाईश भी दी थी। डुल्हारा के आसपास कोयले की अवैध खदाने जानलेवा साबित हो सकती है। जोखिम लेकर ग्रामवासी जरा से लालच में बिना किसी सुरक्षा के कोयला खनन करते है। एक बार फिर ग्रामीणों को कोल माफिया ने अपने जाल में फांसते हुए उन्हें फिर कोयला खनन के लिए राजी कर लिया है। ग्रामीणों के लिए अवैध खदानों से कोल खनन जानलेवा साबित हो सकता है। ऐसी स्थिति में एक बार फिर उसी सख्ती की जरुरत है जो पूर्व कलेक्टर ने डुल्हारा पहुंचकर दिखाई थी।
जिम्मेदारों की आंखों में झोंकी जा रही धूल या फिर सांठ-गांठ
प्रतिदिन डुल्हारा में फारेस्ट लैंड से 8 से 10 ट्राली कोयले का खनन किया जा रहा है। कोयला खनन जिन अवैध खदानों से किया जा रहा है वहां से कुछ ही दूरी पर ट्रेक्टर ट्राली से कोयला ट्रक में लोड किया जाता है। यह कोयला नादिया घाट, सारणी, दमुआ होते हुए परासिया पहुंच रहा है। सूत्र बताते है कि विशेष समुदाय के जिस व्यक्ति की शय पर फिलहाल कोयला खनन जारी है उसका ठिकाना सारणी में भी है। यहां बड़े पैमाने पर स्क्रैप का काम उक्त व्यक्ति द्वारा किया जा रहा है। गौरतलब है कि चोपना, पाथाखेड़ा, सारणी और रानीपुर थानों की सीमा से होते हुए सुरक्षित कोयला परासिया तक पहुंच रहा है, लेकिन चार टीआई और एक एसडीओपी मिलकर भी इस अवैध खनन और परिवहन पर रोक नहीं लगा पा रहे है। खनिज विभाग की भी नजर डुल्हारा में रहती है, इसके अलावा फॉरेस्ट से सटा क्षेत्र होने के कारण वन विभाग का मैदानी अमला भी तैनात रहता है, बावजूद इसके कोल माफिया पर अंकुश लगाने में नाकामी प्रशासन की लचर कार्य प्रणाली या फिर किसी सांठ-गांठ की तरफ ईशारा करती है।इस संबंध में कलेक्टर डॉ सौरभ संजय सोनवणे तथा उत्तर वन मंडल के डीएफओ श्री गर्ग को उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया।बात नहीं हो पाई।
इनका कहना…
हमारी टीम सुबह से मौके पर ही है। नया गड्ढा बनाकर खनन किया जा रहा था, उसे बंद किया जा रहा है।
मनीष पालेवार, खनिज अधिकारी बैतूल

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