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मधुमक्खियों के कहर से न आग बचा पाई न पानी

✓एक किमी तक गमछा घुमाकर भागा युवक पीछा करती रही मधुमक्खियां
परिधि न्यूज खेड़ी सांवलीगढ़

मधुमक्खी के दंश और पीड़ा दोनों ही जानलेवा होती है लेकिन शहद की चाहत में वर्षों से अपना बचाव करते हुए मधुमक्खी के छत्ते से शहद निकाला जाता रहा है। कहावत यह भी है कि एक बार यदि मधुमक्खी बौरा जाए तो उनके कहर से बच पाना मुश्किल है।आज खेड़ी सांवलीगढ़ में ऐसा ही नजारा देखने मिला जब एक युवक के पीछे मधुमक्खियां पड़ गई और बचने के लिए उसने लगभग एक किमी तक दौड़ भी लगाई। प्रत्यक्षदर्शियों ने उसे बचाने के भी प्रयास किए उसके पास आग लगाई और उसे पानी से भरे टाके में भी छुपने के लिए कहा लेकिन मधुमक्खियों के कहर से उसे न आग बचा पाई न ही पानी।युवक का मधुमक्खियों से बचने का प्रयास करने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
गमछा घुमाते हुए भागता रहा युवक
जानकारी के अनुसार बैतूल निवासी बबलू आज सुबह खेड़ी बस्ती में से दौड़ कर गमछा घुमाते हुए बैतूल का रहने वाला बबलू मधुमक्खियों से अपना बचाव कर रहा था। आसपास के दुकानदारों ने उसकी मदद के लिए आग जलाई फिर भी मधुमक्खियों ने पीछा नहीं छोड़ा इसी बीच पास की होटल के बाहर टाके में भरे पानी में उसे डूबने के लिए कहा फिर भी मक्खियां उसे डंक मारती रही।कुछ देर बाद मक्खियां भाग गई उसे उपचार के लिए ले जाया गया। बताया जा रहा है कि बबलू करीब किलोमीटर दूर तक मधुमक्खियों से पीछा छुड़ाने के लिए भागा।

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