उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस पदक से नवाजे जाएंगे कमांडेंट सुभाष चन्द्र यादव
✓भारत-चीन की दुर्गम सीमाओ की सुरक्षा, बाढ़ राहत, मानसरोवर यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका
✓उत्कृष्ट सेवाओं के लिए पुलिस पदक से नवाजे जाएंगे कमांडेंट सुभाष चन्द्र यादव
✓टास्क फोर्स और एनएसजी, कॉमनवेल्थ गेम्स-2010 की सुरक्षा व्यवस्था संभाली
✓लद्दाख में गलवान झड़पों के चरम पर अपने सैनिकों का किया नेतृत्व
गौरी बालापुरे पदम/ परिधि न्यूज बैतूल

लद्दाख, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल जैसे दुर्गम प्रदेशों में देश की सबसे कठिन अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षाओं के लिए विपरीत परिस्थितियों में मुस्तैद रहने वाले हिमवीरों के हौसले उस वक्त और मजबूत हो जाते है, जब देशवासियों की सराहना और सरकार की शाबासी उन्हें मिलती है। देश की सीमाओं पर तैनात सिपाही हो या अधिकारी वह अपने देश के की सुरक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने प्रतिपल तत्पर रहते है। देश के वह पहाड़ी क्षेत्र जो ज्यादातर समय बर्फ से ढके होते है जहां, तापमान 40 डिग्री से नीचे चला जाता है, ऐसे दुर्गम क्षेत्रों की सुरक्षा आईटीबीपी के जवान करते है। हिमाच्छादित दुर्गम क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए उत्कृष्ट सेवाएं देने वाले 15 हिमवीरों को विशिष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित करने की घोषणा गृह मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस 2026 के एक दिन पहले की गई। सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति पदक से सम्मानित होने वाले इन 12 हिमवीरों में एक नाम है कमांडेंट सुभाषचन्द्र यादव का, अपनी कार्यशैली, दक्षता और असाधारण सेवाओं की वजह से आईटीबीपी में उनकी अलग पहचान है।

इस समर्पित अधिकारी को अब तक 26 वर्ष की अनवरत सेवा के दौरान 10 मेडल,12 प्रशंसा पत्र एवं 61 सराहना पत्र सम्मान स्वरुप मिले है। जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा और उतकृष्टता की बानगी है।
वर्तमान में राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा में तैनात 39 बटालियन

ग्रेटर नोएडा में 39 वीं बटालियन के कमांडेंट (सेनानी) के तौर पर सुभाष चन्द्र यादव की वर्तमान पोस्टिंग है, जो मुख्य रूप से राष्ट्रपति भवन की सुरक्षा ड्यूटी में तैनात है। 39 बटालियन की जिम्मेदारी उनकी काबिलियत और उत्कृष्ट आचरण का भी सबूत है। श्री यादव को इस यूनिट के लिए उनके पिछले प्रदर्शन और उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए चुना गया है। 26 साल की बेदाग सेवा, दूरदर्शी नेतृत्व, बेदाग आचरण, शानदार प्रदर्शन, अत्यधिक प्रोफेशनलिज्म और समर्पण को देखते हुए, सुभाष चंद्र यादव, कमांडेंट को गणतंत्र दिवस-2026 के अवसर पर उत्कृष्ट सेवा के लिए पुलिस पदक के लिए चुना गया है।
वर्ष 2017 में कमांडेंट के पद हुए पदोन्नत

वर्ष 2017 में श्री यादव को कमांडेंट के पद पर पदोन्नत किया गया। जिसके बाद उन्होंने 36वीं बटालियन, 47वीं बटालियन और 39वीं बटालियन की कमान सफलतापूर्वक संभाली। उनके कमांड कार्यकाल के दौरान उनकी यूनिट्स को बेस्ट ग्रीन बटालियन-2019, बेस्ट बॉर्डर बटालियन एनडब्ल्यू फ्रंटियर-2022 और बेस्ट नॉन-बॉर्डर बटालियन-2023 घोषित किया गया। नाथुला, सिक्किम से कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने में कमांडेंट श्री यादव की भूमिका महत्वपूर्ण रही आपने यात्रा के साथ संपर्क अधिकारी का कर्तव्य भी बखूबी निभाया। वर्ष 2012-13 में सिक्किम बाढ़ पीडि़तों के बचाव और पुनर्वास में श्री यादव की कर्तव्यपरायणता के लिए सिक्किम सरकार से कई प्रशंसाएं मिली। लद्दाख में गलवान झड़पों के चरम पर अपने सैनिकों का नेतृत्व बढ़ चढक़र किया। गौरतलब है कि श्री यादव को विभिन्न और असाधारण सेवाओं के कारण 10 मेडल, 12 प्रशंसा पत्र और 61 सराहना पत्र प्रदान किये गये हैं।
1999 में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट शुरु किया देश सेवा का सफर

सुभाष चन्द्र यादव अगस्त 1999 में बतौर असिस्टेंट कमांडेंट आईटीबीपी में शामिल हुए। उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख में भारत-चीन सीमा सहित जम्मू-कश्मीर के मुश्किल और संवेदनशील क्षेत्रों में उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित कमांड और स्टाफ पदों पर काम किया, जिसमें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी)में 6 वर्षों का सफल कार्यकाल भी शामिल है। श्री यादव ने चेन्नई, लखनऊ और दिल्ली में टास्क फोर्स की कमान संभाली और फोर्स-01 मुख्यालय में स्टाफ पद पर तैनात रहे कॉमनवेल्थ गेम्स-2010 की सुरक्षा व्यवस्था में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए डीजी, एनएसजी का डिस्क और प्रशस्ति पत्र भी दिया गया है।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
पिता : स्व. श्री फूल चंद यादव
(सेवानिवृत्त शिक्षक),
माता : श्रीमती राम लौटी देवी,
पत्नी : श्रीमती अनीता यादव,
बेटी : सावनी यादव,
पैतृक गांव : उमरी अहारा,
मुंडरवा बस्ती यूपी