सखी सहायता हेल्प डेस्क आखिर किसके लिए…?
✓सखी सहायता हेल्प डेस्क आखिर किसके लिए?
✓समझौतों-समझाईश की कसौटी पर ठगे जा रहे रिश्तें…!
परिधि न्यूज, बैतूल

मामूली विवाद के कारण टूटते परिवारों को बचाने में परिवार परामर्श केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है , लेकिन शासन के एक आदेश के बाद पूरे मध्यप्रदेश में परिवार परामर्श केन्द्र बंद कर दिए गए। केन्द्र सरकार की स्वाधार गृह योजना के तहत पुलिस विभाग की ओर से परामर्श केन्द्र संचालित किए जा रहे थे, 11 मार्च 2015 को शासन ने पत्र द्वारा सभी परामर्श केन्द्र और महिला हेल्प लाइन को 1 अप्रैल 2015 से बंद करने के निर्देश दिए थे, लेकिन प्रदेश में फिर भी मार्च 2024 तक केन्द्रों का संचालन किया जाता रहा। इसके बाद रीवा जिले में संचालित परामर्श केन्द्र के संबंध में एक याचिका उच्च न्यायालय में दाखिल करने के बाद 1 अप्रैल 2024 से परामर्श केन्द्र तथा महिला हेल्प लाइन को तत्काल बंद कर दिया गया था। परिवार परामर्श बैतूल में भी बंद हो गए लेकिन 6 अगस्त 2025 को फिर से परिवार परामर्श केन्द्र की तर्ज पर ही सखी सहायता हेल्प डेस्क की शुरुआत तत्कालीन एसपी निश्चल एन झारिया एवं एएसपी कमला जोशी द्वारा की गई। सखी सहायता, सखी समाधान या सखी हेल्प डेस्क नाम से जाने जा रहे इस केन्द्र की उपयोगिता किसके लिए है, यह सवाल केन्द्र की कार्यप्रणाली को देखते हुए उठने लगे है। जानकारी के अनुसार सखी हेल्प डेस्क में आने वाले प्रकरणों की फाइल सुलह न होने पर पीड़ित के लिए न्यायालय में भी काम नहीं आ सकेगी। पुलिस विभाग के अस्पताल भवन में संचालित हो रहा सखी सहायता हेल्प डेस्क सूत्रों की माने तो कुछ महिला अधिकारियों की सखियों का केन्द्र बनकर रह गया है, जिसमें अधिकारी के करीबी और उनसे जुड़े लोगों को शामिल किया है। पति-पत्नी को समझाईश देने के लिए संचालित किए जा रहे सखी सहायता में एक भी पुरूष परामर्श दाता को नियुक्त नहीं किया गया।
काउंसलिंग के नियमों को दिखाया जा रहा ठेंगा

पुलिस बल की भारी कमी के बावजूद प्रति बुधवार और शुक्रवार को एक पुलिसकर्मी की ड्यूटी सखी केन्द्र में लगाई जा रही है। हंसी-ठहाकों के बीच मायूस परिवारों को समझाईशें दी जाती है। काउंसलिंग में गंभीरता और समझ जरुरी है, लेकिन ऐसा कुछ सखी केन्द्र में नजर नहीं आता अपितु काउंसलर्स के ठाठ यहां देखने मिल जाएंगे। एक और ध्यान देने वाली बात यह भी है कि अधिवक्ता, पत्रकार और इन्हीं से जुड़े परिवार के सदस्य काउंसलिंग कर रहे है। जिसका सीधा फायदा भी अधिवक्ता और कुछ पत्रकारों को है। यहां सेवाएं देने वाली सखियां जोर-शोर से सार्वजनिक मंचों एवं सामाजिक कार्यक्रमों में कई प्रकरणों पर चर्चा कर गोपनीयता को भी भंग कर रही है। वस्तुत: वे पुलिस से अपनी नजदीकियां बताकर अपनी पैठ दिखाने की कोशिश भी करती है। सखी केन्द्र में एक परिवार को घेरकर जिस तरह से आधा दर्जन से अधिक सखियां समझाईश देती है उस वक्त एक दूसरे से श्रेष्ठ परामर्शदाता होने की प्रतिस्पर्धा भी साफ नजर आती है। यदि प्रकरण सुलझा तो ठीक नहीं तो यह प्रकरण सीधे सामने बैठे अधिवक्ता की झोली में ही जा सकता है। सूत्रों की माने तो सखी केन्द्र की सखियां अब तो यह भी कहती है कि पुलिस का फलां अधिकारी वह तो उनके घर का ही है। अधिकारियों के कार्यालय और घर में होने का हिसाब भी कुछ लोग बड़ी शिद्दत से रख रहे है।
जब वन स्टॉप सेंटर है तो सखी समाधान क्यों…?

पुलिस परिवार परामर्श केन्द्र बंद किए जाने के बाद महिला बाल विकास विभाग द्वारा संचालित वन स्टॉप सेंटर में महिलाओं की फरियाद जाती है। वन स्टॉप सेंटर में भी पीडि़त महिलाओं के लिए एक ही स्थान पर पुलिस डेस्क, कानूनी सहायता और काउंसिलिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। एक ही जगह पीडि़त महिलाओं और बालिकाओं को सहायता और सहयोग की सुविधा मिलेगी, केन्द्र सरकार ने वन स्टॉप सेंटर की शुरुआत भी इसी उद्देश्य से की थी।
बैतूल में भी वन स्टाप सेंटर 17 सितंबर 2017 से सेवा के लिए उपलब्ध है। जहां एक ही छत के नीचे काउंसलिंग से लेकर, शासकीय अधिवक्ता और कुछ दिनों तक पीडि़तों को रखने की भी सुविधा है। वन स्टॉप सेंटर में प्रतिमाह 40-50 प्रकरण काउंसलिंग के लिए पहुंचते है, इन प्रकरणों की गोपनीयता का भी ध्यान रखा जाता है। सीएम हेल्प लाईन, पुलिस थानों एवं जनसुनवाई में आने वाले प्रकरण भी वन स्टाप सेंटर को ही भेजे जाते है। यहां होने वाली काउंसलिंग की बाकायदा फाईल बनाई जाती है, सुलह न होने पर यदि प्रकरण न्यायालय की शरण में पहुंंचता है तो वन स्टाप सेंटर से प्रकरण की फाईल भी न्यायालय में आवश्यकता पडऩे पर प्रस्तुत की जाती है। ऐसे में सखी सहायता डेस्क की उपयोगिता किसके लिए है यह सवाल गंभीर है।
यह है सखी केन्द्र की परामर्शदाता सखियां
वैसे तो सखी समाधान की नोडल एएसपी श्रीमती जोशी से बैतूल की समाजसेवी प्रेरणा शर्मा, कविता मालवीय एवं अन्य ने भी सखी केन्द्र में सेवाएं देने की इच्छा जाहिर की थी, जिस पर एक पर्ची पर उनके नाम एवं नंबर लिखकर एएसपी द्वारा उन्हें कॉल करके बुलाने का कहा भी था, लेकिन न कोई कॉल इन समाजसेवियों के पास आया न ही किसी तरह की कोई सूचना ही आज तक दी गई। गौरतलब है कि सखी सहायता केन्द्र के वाट्सएप गु्रप में 19 सदस्य है, जिनमें एएसपी कमला जोशी, डीएसपी शेफा हाशमी के अलावा 4 अन्य एडमिन कुमारी तुलिका पचौरी (समिति अध्यक्ष), प्रमिला धोत्रे (सचिव), निमिषा शुक्ला (उपाध्यक्ष) शामिल है। इसके अलावा मीरा एंथोनी, गुंजन खण्डेलवाल, रेखा गुजरे, वंदना कुंभारे, अधिवक्ता दीपिका भावसार, अरुणा पाटनकर, उषा पॉलिवाल, प्रीति ओसवाल, वर्षा उमप, नीलिमा भार्गव सहित अन्य शामिल है।
बैतूल को 1997 से 2024 तक मिली परिवार परामर्श केन्द्र की सेवाएं
बैतूल जिले में वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त एएसपी केके पांडे एवं वरिष्ठ नागरिक संगठन के उनके साथियों की पहल पर राज्य स्तरीय परिवार परामर्श केन्द्र प्रारंभ हुआ था। तत्कालीन एसपी प्रमोद फलणीकर के कार्यकाल में प्रारंभ परिवार परामर्श केन्द्र में हजारो परिवारों के बीच सुलह हुई और बैतूल की इस पहल को पूरे राज्य में अपनाया गया था। परिवार परामर्श केन्द्र से जुड़ी वरिष्ठ समाजसेवी संगीता अवस्थी बताती है कि यह केन्द्र पूर्णत: निस्वार्थ, नि:शुल्क और निष्पक्ष कार्य करता था। परिवार परामर्श केन्द्र में प्रत्येक परामर्शदाता अनुभवी एवं समाज पर भी प्रभाव रखने वाले थे। इस केन्द्र में खासतौर से अधिवक्ता, पत्रकार एवं ऐसे व्यवसाय से जुड़े लोगों को दूर रखा गया था, जिन्हें पति-पत्नी या अन्य पारिवारिक कलह के मामलों से सीधा फायदा होने की संभावना रहती थी।
प्रकरणों का लेखा-जोखा नहीं रख रही पुलिस
पुलिस का संभवत: यह पहला नवाचार है जिसमें सखी सहायता केन्द्र में समझाईश के लिए भेजे जाने वाले प्रकरणों का कोई लेखा जोखा पुलिस के पास ही नहीं है। हैरत की बात यह है कि किस प्रकरण में पति-पत्नी या पारिवारिक सदस्यों को कितने बार बुलाया गया, उस प्रकरण में क्या प्रोगे्रस यह जानकारी भी नहीं है जिससे सखी केन्द्र की पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजमी है। यहां तक कि हेल्प डेस्क की कार्रवाई का परिवार को न्यायालय की शरण में जाने पर कोई लाभ भी नहीं मिलेगा। महिला थाने में एक रजिस्टर रखा गया है, जिसमें बुधवार और शुक्रवार को मशवरा देने आने वाली समिति की महिलाओं द्वारा नाम लिखकर हस्ताक्षर कर दिए जाते है। इसके अलावा पुलिस से जुडक़र जो लोग पुलिस के सखी सहायता हेल्प डेस्क में सेवाएं दे रहे है उनकी कोई प्रोफाईल, एजुकेशन, अनुभव, सेवाए देने संबंधी आवेदन, सहमति पत्र और उनका आचरण एवं काउंसलिंग संबंधी अनुभव प्रमाण पत्र भी पुलिस के पास नहीं है। पुलिस विभाग द्वारा बुधवार और शुक्रवार को अनुबंधित फे्रन्चाईसी से सखियों की खातिरदारी की व्यवस्था भी की जा रही है, हालांकि इसका बिल किसके खाते से जा रहा है यह कहना अभी संभव नहीं है।
संस्था-सजातीय विशेष सखी सहायता हेल्प डेस्क
आम तौर पर एक अधिकारी के नवाचार को दूसरा अधिकारी ज्यादा दिन तक चला नहीं पाता है, लेकिन पूर्व एसपी निश्चल एन झारिया के नवाचार को बिना किसी ठोस लिखा -पढ़ी के तवज्जों दी जा रही है। सखी सहायता हेल्प डेस्क के लिए नोडल अधिकारी भले ही एएसपी कमला जोशी है, लेकिन इसका संचालन पुलिस विभाग से उपकृत एक संगठन विशेष एवं सजातीय सखियों को सौंप दिया गया है। इसके लिए बाकायदा एक वाट्सएप गु्रप भी बनाया गया है, जिसमें कुल 19 सदस्य है। 19 सदस्यों के वाट्सएप गु्रप में किसी प्रत्याशा महिला एवं बाल उत्थान समिति की संस्था की अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव सहित स्वयं एएसपी एडमिन है। इन 19 परामर्शदाताओं में करीब 8 सदस्य सजातीय है दो चार को छोडकर सभी प्रत्याशा संस्था के बोर्ड मेम्बर या सदस्य है। सखी सहायता हेल्प डेस्क में वैसे तो कुछ वरिष्ठ समाजसेवी जैसे मीरा अंथोनी, रेखा गुजरे एवं गुंजन खण्डेलवाल को भी रखा गया है, जो पूर्व में परिवार परामर्श केन्द्र में भी अपनी सेवाएं दे चुके है लेकिन पांच ही महीनों में इन वरिष्ठ समाजसेवियों का सखी हेल्प डेस्क से मोह भंग होने लगा है। इस संबंध मेें जानकारी के लिए एएसपी कमला जोशी के मोबाईल नंबर 7747044355 पर संपर्क किया किंतु उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
इनका कहना…
महिला थाने में एक रजिस्टर रखा गया है, जिसमें सखी सहायता केन्द्र में बुधवार और शुक्रवार को जो परामर्शदाता आते है वह अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर करते है। प्रकरणों की जानकारी पुलिस के पास नहीं है।
सेवंती परते, महिला थाना प्रभारी बैतूल
वन स्टाप सेंटर में किसी भी तरह की हिंसा से पीडि़त महिलाओं को कानूनी सहायता, पुलिस सहायता, परामर्श, आश्रय और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
अनामिका तिवारी, प्रशासक वन स्टाप सेंटर