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चांद मत बनो सूर्य की तरह आत्म बल बढ़ाओ स्त्रियां फैशन की गुड़िया बनकर साजसज्जा तक सीमित नहीं रहे : योग शक्ति आस्था दीदी

✓चांद मत बनो सूर्य की तरह आत्म बल बढ़ाओ स्त्रियां फैशन की गुड़िया बनकर साजसज्जा तक सीमित नहीं रहे : योग शक्ति आस्था दीदी

परिधि न्यूज घोड़ाडोंगरी 

दुर्गा चौक घोड़ाडोंगरी में ब्रह्माकुमारी द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत गीता ज्ञान प्रवचन के पांचवें दिन आस्था दीदी ने कहा कि जीवन अपने सोचने पर निर्भर करता है अच्छा सोचोगे तो जीवन में अच्छा होगा आज प्रॉपर्टी बंटवारे में कम ज्यादा हो जाए तो लड़ाई झगड़ा खून खराबा कोर्ट कचहरी हो जाती है ।लेकिन परमात्मा की प्रॉपर्टी पाने के लिए अपना कदम बढ़ाना है। परमात्मा से संबंध नहीं जोड़ पाने के कारण उनकी प्रॉपर्टी नहीं मिल पा रही है लोगों में भ्रांतियां है कि ब्रह्माकुमारी आश्रम जाने पर पति-पत्नी को भाई-बहन बना देते हैं ऐसे देखे तो पूरा संसार उस परमपिता की संतान हैं काम क्रोध लोभ नरक के द्वारा हैं इन्हें छोड़ दो ।आश्रम में आत्मा के उत्थान के बारे में बताया जाता है ।कामनाएं वासनाये है नर्क का द्वार है भौतिक सुख थोड़ी देर अच्छे लगते हैं उसके बाद दुख और अशांति के अलावा कुछ नहीं मिलता।

काम क्रोध लोभ मोह नरक के द्वार हैं हम अपनी कमजोरी को छुपाने के लिए दूसरों को दोष देते हैं आत्म कल्याण के लिए सत्य बोलना विषय वासनाओं से दूर रहना सुबह जल्दी उठना का संदेश संस्थान के माध्यम से दिया जाता है भारत को देवभूमि कहा जाता है क्योंकि यहां देवताओं ने जन्म लिया आज ताड़का जैसी वृत्ति जिसमें गंधर्व से विवाह करने के लिए अपने पिता को छोड़ देती है ऐसा ही आज हो रहा है आज ऐसा हो रहा है बिन फेरे हम तेरे ।

परमात्मा की प्रॉपर्टी लेने आगे नहीं आ रहे हैं सुदर्शन चक्र से प्रेरणा मिलती है स्वयं का दर्शन करें अंदर के बुरे विकारों का नाश करें जीवन में सूखा पड़ा हुआ है ज्ञान का हल चलेगा तो सुख शांति की वर्षा होगी। भगवान से जो मांगोगे वह जरुर दिलाएंगे। वैभव धनसंपदा कितनी बढ़ जाए सुख शांति मिलना असंभव है जीवन का लक्ष्य पता होना चाहिए लक्ष्य से भटक गए तो अपने कर्मों का फल भोगना ही पड़ेगा ।

सीता हरण की कथा प्रेरणा देती है आत्मा रूपी सीता की कथा है जो सोने की लंका में पहुंच गई लेकिन सुख चैन छिन गया। रावण की लंका की तरह सारी सुख सुविधाओं में जी रहे हैं पर आत्मा रूपी सीता सुख में है या दुख में है। वही सुखी है जो राम के साथ है रेगिस्तान में पानी नहीं होता लेकिन प्यासे को सूर्य की किरणों से चमकती रेत पानी की तरह दिखाई देती है मृग तृष्णा आज अपनी इच्छाओं को कुछ ऐसे ही यह वैभव उसे पानी की तरह दिखाई दे रहा है पर इच्छाएं पूरी नहीं होती ।आज देश में दान करने वालों की कमी नहीं है तो भिखारीयो की भी कमी नहीं है हमें समझ नहीं होता असली नकली का भेद नहीं कर पाते। दान पात्र व्यक्ति को ही करना चाहिए सोच समझकर करना चाहिए। सुख सुविधा की कैद में मनुष्य है डर है तो अंदर किसी तरह की बुराई है । जिसके साथ परमात्मा है उसे डर नहीं लग सकता लक्ष्मण रेखा मर्यादा की रखा है लांग जाए तो दोबारा वह स्थान प्राप्त नहीं कर सकते । मर्यादा में जीवन जीना शुरू करें तो बुराई छू नहीं सकती आज बहुत से अपनी मर्यादा को छोड़ चुके हैं । नारियों ने वेशभूषा की मर्यादा को छोड़ दिया है बड़े शहरों से छोटे शहरों तक पाश्चात्य संस्कृति पहुंच गई है इसलिए आज घटनाएं हो रही है और समाज कलंकित हो रहा है पर्दा प्रथा तब चली थी जब विदेशियों का प्रभाव देश पर था स्त्रियां सुरक्षित नहीं थी महिलाओं से कहा कि चांद मत बनो सूर्य की तरह आत्म बल बढ़ाओ स्त्रियां फैशन की गुड़िया बनकर साजसज्जा तक सीमित नहीं रहे सुंदरता इकट्ठी मत करो प्रदर्शन करोगे या शांत बैठकर आत्मा का दर्शन करना होगा अगर इस पर काम नहीं किया तो संसार की हालत और बुरी हो जाएगी । धर्म आज तिनके के बराबर बचा है अपने अंदर का बल बढाओ जीवन में परहेज अपनाना चाहिए शुद्धता को जीवन में अपनाओगे तो बुराइयों का प्रभाव नहीं पड़ेगा सिंपल संतुलित सात्विक रहेंगे तो स्वस्थ रहेंगे ।सब मन का खेल है ताजगी मन से आती है विचारों से आती है चाय से नहीं । नशे नानवेज से दूर रहोगे तो प्रभु के पास रहोगे इंसान पानी छानकर पीता है और मछली को खाता है आजकल अनुसंधान रिपोर्ट कहती है कि शाकाहारी लंबा जीते हैं स्वस्थ रहते हैं ।लोगों को लगता है कि अंडा नॉनवेज नहीं है कौन से पेड़ में लगता है क्या कुछ दिन परहेज करना सनातन संस्कृति है सभी का अभी सुधरने का टाइम चल रहा है वैसे तो यह जिंदगी बहुत खूबसूरत है बस थोड़ा समझने की जरूरत है परमात्मा की शरण सुरक्षा कवच का काम करेगी।

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